प्रिय साथियों ! अप्रकाशित उपन्यासों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज आपको इस पोस्ट में हम बताने जा रहे हैं एक और अप्रकाशित उपन्यास "असली केशव पंडित" के बारे में जो कि शगुन शर्मा का है !
विज्ञापन के अनुसार यह उपन्यास शगुन शर्मा के एक महाविशेषांक के रूप में तुलसी पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होने वाला था। विज्ञापन में उपन्यास की कहानी का आधार दो केशव पंडित को दर्शाया गया है - एक असली केशव और दूसरा नकली केशव। साथ ही विजय, विकास और अल्फांसे के किरदार भी कहानी में उपस्थित हैं। विज्ञापन के हिसाब से अगर देखा जाए तो इस कहानी में असली केशव पंडित, विजय, विकास और अल्फांसे जैसे दिग्गजों की जबरदस्त दिमागी टक्कर नकली केशव पंडित के साथ होती है।
अगर ये उपन्यास महाविशेषांक के रूप में प्रकाशित हुआ होता तो इस दिमागी टक्कर को पढ़ना शायद रोचक रहता। शायद इसलिए क्योंकि केशव पंडित का एक अच्छा और दिमागी दांव-पेंच से भरपूर उपन्यास लिखना इतना आसान नहीं है।
उपरोक्त लिखित जानकारी के अलावा हमारे पास इस उपन्यास के बारे में अन्य कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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