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27 अक्टूबर 2021

चिड़ीमार - राज भारती (अप्रकाशित उपन्यास)

आज हम इस पोस्ट में बात कर रहे हैं दिवंगत प्रसिद्ध लेखक राज भारती जी के अब तक अप्रकाशित उपन्यास चिड़ीमार की!!

चिड़ीमार उपन्यास की पब्लिसिटी राज भारती जी द्वारा रचित किरदार कमलकांत की चक्रव्यूह सीरीज के 28वें उपन्यास के रूप में की गयी थी और इसका ad भी दिया गया था पर ये उपन्यास कभी प्रकाशित नहीं हो पाया


  

Ad में कहानी की भूमिका कुछ इस प्रकार दी गई है कि एक अनाम किरदार अपने आप को बड़ा सूरमा समझता है पर उसका टकराव कमलकांत से होता है और कमलकांत उसे नाम देता है "चिड़ीमार"!!

इस उपन्यास के बारे में अभी तक ये पता नहीं लग सका है कि इसका प्रकाशन किस कारण से रुका! 

क्या उपन्यास राज भारती जी के असामयिक निधन के कारण लिखा ही नहीं जा सका या लेखन अधूरा रह गया या फिर लेखन तो पूरा हुआ पर उपन्यास का प्रकाशन नहीं हो पाया? 

कारण चाहे जो भी रहा हो, पाठकों को आज भी इस उपन्यास का इन्तजार है कमलकांत की चक्रव्यूह सीरीज अभी भी अधूरी है चिड़ीमार उपन्यास का प्रकाशन न सिर्फ इस अधूरेपन को भर सकता है बल्कि पाठकों को एक बार फिर कमलकांत की हैरतअंगेज दुनिया में जाने का अवसर दे सकता है


अगर आपके पास इस सन्दर्भ में कोई भी जानकारी हो तो हमें कमैंट्स के माध्यम से अवश्य अवगत कराएं


01 अक्टूबर 2021

पीरागढ़ी का प्रेत - राजभारती

उपन्यास 📖: पीरागढ़ी का प्रेत 
लेखक ✍: राजभारती
पेज संख्या 📃: 289

एक ऐसे भयानक प्रेत की दास्तान जो एक काले बिल्ले के वेश में रहता था और एक हसीना पर आसक्त हो गया था। 

"वो एक काला बिल्ला था जो कि बहुत ही भयानक शक्ल वाला प्रेत था। उसके पास अपरंपार ताकत थी। दुनिया भर के बेशकीमती हीरे जवाहरात और खजाने लाकर उसने नीलम के कदमों में डाल दिए थे।"

कहानी की शुरुआत नीलम और आशीष की शादी से होती है। नीलम की शादी आशीष से होने वाली होती है पर शादी से कुछ पहले कुछ ऐसी भयानक घटनाएं घटने लगती हैं जिस से आशीष और नीलम के घरवाले भयभीत हो जाते हैं। शादी होने के पश्चात नीलम आशीष की दुल्हन बन कर आशीष के घर आ जाती है पर आशीष नीलम के साथ न ही सुहागरात मना पाता है और ना ही नीलम को स्पर्श कर पाता है। एक काला बिल्ला आशीष और नीलम की जिंदगी में जहर घोल देता है। हरबंस मामू और उनके पीर की मदद ली जाती है और हरबंस मामू उस प्रेत को भगाने के लिए कब्रिस्तान में आपनी और से पूरा प्रयास करते हैं पर वो प्रेत तो भागने की जगह और भयानक हो जाता है। 

उपन्यास समाप्त होने पर कुछ सवाल आपके दिमाग में सहज ही छोड़ जाता है जैसे कि:

कब्रिस्तान में लाशों के ऊपर बैठने वाला व्यक्ति कौन था ? 
शहजादा करल कौन था?
कुत्ते जैसी ज़बान वाली चुड़ैल कौन थी और वो नीलम के बेड पर ही क्यों सोती थी?
रोज रात को नीलम के पैरों से लिपट कर सोने वाला अजीब सा नीला जानवर कौन था? 
आशीष की मां के बेड पर कफन में लिपटा हुआ वो जला हुआ आदमी कौन था जिसके पूरे जिस्म पर बाल थे और उसकी आधी खोपड़ी उधड़ी हुई थी?
काले बिल्ले का रहस्यमयी घर कैसा था जहां पर शैतान और भयानक आदमखोर जिन्न रहते थे ?
क्या नीलम उस काले बिल्ले के प्रकोप से मुक्त हो पाई ?
इमली वाले बाबा कौन थे जिनके वश में कई जिन्नात थे ?
जिन्नात और प्रेत के लड़ाई में कौन जीता ?
 
इन्ही सब सवालों के जवाब पाने के लिए पीरागढ़ी का प्रेत ज़रूर पढ़े । 

उपन्यास की घटनाओं को राज भारती जी ने बहुत ही अच्छे से पिरोया है। हरबंस मामू और उनके पीर का किरदार तो जबरदस्त है ही, पर उससे भी ज्यादा जबरदस्त है वो काला बिल्ला जो हमेशा नीलम के इर्द गिर्द घूमता रहता है। 

ये कहानी दो भाग में है - पहला भाग है "पीरागढ़ी का प्रेत" उपन्यास और दूसरा भाग है 'प्रेत की दुल्हन" उपन्यास। 

पीरागढ़ी के प्रेत में पूरे उपन्यास में प्रेत लीलाओं का वर्णन है । कुछ सीन तो इतने भयानक लिखे हुए हैं कि उनको पढ़ते वक्त आपको महसूस होगा कि वो काला बिल्ला आप ही के आस पास कहीं है।
ये उपन्यास भूत-प्रेत के ऊपर लिखी कहानियों में एक मील का पत्थर है। एक बार जरूर पढ़ कर देखे।

10 जुलाई 2021

मायाजाल - राज भारती

उपन्यास: मायाजाल

लेखक: राज भारती जी

पेज संख्या: 440

प्रिंट रेट: 399 रुपये

प्रकाशक: धीरज पॉकेट बुक्स (मेरठ) तथा अजय पॉकेट बुक्स (दिल्ली)


"मायाजाल एक उपन्यास नहीं एक ख्वाब है |

ऐसा ख्वाब जिसे देखते देखते इंसान आतंकित और भयभीत हो उठ बैठे..

पर फिर देखने की आस में आँखें बंद कर ले.."


नया उपन्यास कवर


पुराना उपन्यास कवर


मायाजाल उपन्यास एक वृहद् फैंटसी सीरीज "अग्निपुत्र सीरीज" का प्रथम उपन्यास है और काफी साल पहले लिखा गया था, इसलिए नए पाठकों की जानकारी के लिए यहां बताना चाहूंगा कि राज भारती जी ने अग्निपुत्र सीरीज की रचना एक ऐसे किरदार 'अग्निपुत्र' को केंद्र में रखकर की थी जो कि उपन्यास जगत में सामान्यतया प्रस्तुत किए गए अन्य मुख्य नायकों से अलग है | 

इस उपन्यास को धीरज पॉकेट बुक्स (मेरठ) तथा अजय पॉकेट बुक्स (दिल्ली) द्वारा संयुक्त रूप से दुबारा प्रकाशित किया गया है | राज भारती जी ने अग्निपुत्र सीरीज में लगभग 70 उपन्यास लिखे हैं जिनकी सूची आप इसी ब्लॉग पर पोस्ट "राज भारती (प्रसिद्ध हिंदी उपन्यासकार)" में देख सकते हैं |


अब आते हैं उपन्यास की कहानी पर | कहानी आरम्भ होती है एक हवाई जहाज में निश्चिन्त बैठे यात्रियों के दृश्य से जिनकी यात्रा एक घंटे में पूरी होने वाली है | अचानक एक बहुत ही भयानक तूफ़ान हवाई जहाज को अपने आगोश में ले लेता है जिससे बचना लगभग असंभव होता है | 

जहाज का एक पायलट अपने साहस से जहाज को किसी तरह तूफ़ान से बाहर निकाल लेता है पर जहाज एक बेहद वीरान बर्फीले क्षेत्र में बुरी तरह से क्रैश हो जाता है | क्रैश में कुछ यात्री एवं विमान परिचारिकाएं भी मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं |

यहां से शुरू होता है इन बचे हुए जहाज कर्मियों और यात्रियों का बर्फीली मृत्यु के साथ लम्बा जानलेवा संघर्ष जो इस वीरान और बेहद ठंडे इलाके में हर तरफ मुंह फैलाये खड़ी थी | 

यात्री प्रोफेसर दयाल और उनकी 2 सुंदर-सुशील बेटियाँ बाला और कविता कड़े संघर्ष के बाद किसी तरह मौत के जबड़े से बाहर निकल तो आते हैं पर इस अनजान, सुनसान और बर्फीले क्षेत्र में जिंदगी की उम्मीद अभी भी उन्हें कहीं नजर नहीं आती है | 

कुछ और मेहनत के बाद प्रोफेसर दयाल आखिरकार उस सुनसान क्षेत्र में एक पीने लायक पानी का झरना और एक ऐसी जगह ढूंढ लेता है जो देखने में बाहर से तो ठीक-ठाक पर अंदर से सुरंग जैसी होती है | अंदर प्रवेश करते ही प्रोफेसर और उसकी बेटियां उस सुरंग को अंदर से साफ़-सुथरी और सजी-धजी देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं | परन्तु वहां एक शीशे के ताबूत में एक विचित्र से सुनहरे रंग के आदमी को सोया देखकर तो वो लोग बुरी तरह से चौंक पड़ते हैं | प्रोफेसर किसी तरह से इस सुनहरी रंग वाले इंसान को गहरी नींद से जगाने में सफल हो जाता है |


!! जी हाँ, ये विचित्र से सुनहरी रंग वाला इंसान ही तो है अग्निपुत्र !!

परन्तु....

कौन है अग्निपुत्र ?

क्यों गहरी नींद में सो रहा था अग्निपुत्र ?

क्या परिणाम हुआ प्रोफेसर द्वारा अग्निपुत्र को गहरी नींद से जगाने का ?

क्या थी अग्निपुत्र की गाथा ?

क्या-क्या रहस्य थे अग्निपुत्र की गुफा में जिन्होंने प्रोफेसर दयाल और उसकी पुत्रियों को स्तब्ध कर दिया था ?

क्या परिणाम हुआ था हवाई जहाज के यात्रियों के संघर्ष का, उस सुनसान बर्फीले क्षेत्र में ?

किस तरह से पायलट्स ने यात्रियों को बचाया था उस भयानक तूफ़ान से ?

इन सब प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए आपको राज भारती जी के रचे हुए मायाजाल में प्रवेश करना होगा |


कुल मिलाकर उपन्यास की कहानी अच्छी लगी | अगर आपको भी फैंटसी उपन्यास पढने में दिलचस्पी है तो एक बार इस उपन्यास को जरूर पढ़कर देखें |

तूफ़ान और हवाई जहाज के क्रैश के दृश्य, पायलट्स की सूझ-बूझ, मीलों तक फैली बर्फ में यात्रियों का मानसिक अंतर्द्वंद, प्रोफेसर दयाल की नेतृत्व क्षमता, अग्निपुत्र की रहस्मयी कहानी, लेखक द्वारा उपन्यास में पुराने और ऐतिहासिक दृश्यों का विवरण कई जगहों पर अच्छा बन पड़ा है | अग्निपुत्र का किरदार उत्सुकता पैदा करता है |

उपन्यास की प्रूफ रीडिंग अन्य उपन्यासों के मुकाबले बेहतर है और शाब्दिक गलतियां कम ही हैं | जो थोड़ी बहुत गलतियां है वो भी उपन्यास को पढ़ने में कोई अधिक रुकावट पैदा नहीं करती हैं |

 

रेटिंग: 9/10


21 जून 2021

राज भारती (प्रसिद्ध हिंदी उपन्यासकार)


राज भारती जी अपने समय के बहुत मशहूर उपन्यासकार थे | राज भारती जी का ओरिजिनल नाम करतार सिंह था । वो पंजाबी सिख थे और उनका सात सदस्यीय भरा-पूरा परिवार था । बाद में उन्होंने दाढ़ी-मूँछ कटवा ली थी । राज भारती जी पश्चिम दिल्ली के पटेल नगर में रहते थे | उनका स्वर्गवास 27 सितम्बर 2011 को हुआ ।





राज भारती जी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में नौकरी करते थे । उनको लिखने का जूनून था । अपने इसी जूनून के कारण उन्होंने 1978 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की नौकरी छोड़कर हिंदी पल्प फिक्शन लेखन में अपना करियर बनाया ।

राज भारती जी की पत्नी सरोज कांता जी ने राज भारती जी के लेखन के प्रति जूनून को इन शब्दों में व्यक्त किया था "वो पश्चिम दिल्ली के पटेल नगर में स्थित अपने घर में चाय पीते हुए पात्रों की कल्पना करते रहते थे। वो देर रात में लिखते थे । जब वो लिखते थे तो अपनी ही दुनिया में चले जाते थे - एक ऐसी दुनिया जिसे सिर्फ वो ही जानते और समझते थे ।"

इनका लिखने का जूनून ऐसा था कि एक समय पर इन्होने हॉरर के अलावा सब लिखना छोड़ दिया और चार वर्षों में राज भारती के रूप में 40 से भी अधिक हॉरर उपन्यास लिख डाले ।

राज भारती (करतार सिंह) जी ने सभी तरह के उपन्यास लिखे पर उनके फैंटसी और हॉरर नोवेल्स बहुत फेमस हुए थे । राज भारती जी ने अपने आप को हिंदी उपन्यास लेखन के पटल पर एक अग्रणी हॉरर और फैंटसी लेखक के रूप में स्थापित किया और इस श्रेणी में वो पाठको की पहली पसंद बन गए थे | इनके उपन्यासों की खासियत थी कि ये स्टोरी कुछ इस प्रकार लिखते थे कि पाठक का मन अधिकतर नावेल कम्पलीट करके के ही मानता था |


उन्होंने विभिन्न धाराओं (असामान्य और अलौकिक घटनाएं, पौराणिक कथाएँ, साई-फाइ, हॉरर, ऐतिहासिक घटनाओं इत्यादि) का अध्ययन किया और इनके मिश्रण से भूत-प्रेत, पिशाच और आत्माओँ से युक्त मायावी दुनिया की रचना कर पाठको को इस दुनिया की सैर करवाई | ऐसे कुछ उपन्यासों के नाम है:- स्वाहा, प्रेत की दुल्हन, पिशाच कन्या, रक्त भैरवी, पिशाच सुंदरी, प्रेत जाल इत्यादि.. | 


उनके हॉरर उपन्यासों की बिक्री अन्य हॉरर लेखकों के मुकाबले अधिक होती थी | उनके उपन्यास आज भी डिमांड में है | बहुत से पाठक उनके उपन्यासों का उदाहरण देकर प्रकाशकों से वैसे ही नए डरावने उपन्यासों की मांग भी करते है | उनके उपन्यासों को छापने वाले पुराने प्रकाशकों का मानना है कि राज भारती जैसा लेखक दुबारा मिलना बहुत कठिन है |


राज भारती जी ने कई पैन नामों से उपन्यास लिखे थे | उनका पहला उपन्यास सामाजिक उपन्यास "मुस्कुराहट कैद है" था जो करतार सिंह क्वारा के नाम से छपा था। राज भारती जी ने वेदप्रकाश कांबोज की विजय रघुनाथ सीरीज के पात्र को लेकर लिखना शुरू किया था। उन्होंने S KUMAR के नाम से भी काफी जासूसी उपन्यास लिखे और सावन के नाम से सामाजिक उपन्यास भी लिखे थे।


अपनी अलग पहचान बनाने के बाद उन्होंने थ्रिलर उपन्यास, अग्निपुत्र सीरीज, कमलकांत सीरीज, इंद्रजीत सीरीज, आनंद बेदिल सीरीज, अभय वर्मा सीरीज, गोकुल पांडे सीरीज, हॉरर, करण धारीवाल सीरीज, प्रीतम शौरी सीरीज, सागर सीरीज, सागर पुत्र सीरीज, शालियार खान सीरीज, समीर साहनी सीरीज, संग्राम सीरीज आदि बहुत सी सीरीज राज भारती के नाम से लिखी। इनमे अग्निपुत्र, कमलकांत और संग्राम सीरीज ने राज भारती जी को नई और विशिष्ट पहचान दिलवाई । 


जितनी अधिक सीरीज और पात्रों की रचना राज भारती जी ने की है, उतनी शायद ही किसी अन्य लेखक ने की होगी ।


अग्निपुत्र सीरीज एक ऐसे अमर प्राणी अग्निपुत्र पर आधारित है जो न जाने कितनी सदियों से जीवित है | आसमान के सितारे उसके दोस्त है, | आग उसे जलाती नहीं बल्कि शक्ति प्रदान करती है | समुद्र उसे अपनी गोद में पनाह देता है | वायु उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती | अग्निपुत्र बहुत बलशाली है | उसके जिस्म अभेद्य है जिस पर किसी हथियार का प्रभाव नहीं होता है | केवल जादू ही उसकी कुछ हद तक कमजोरी है पर जादू भी उसे कोई शारीरिक या मानसिक हानि नहीं पहुंचा सकता है | अग्निपुत्र सीरीज में अग्निपुत्र प्रोफेसर और उसकी दो बेटियों को अपनी सदियों की गाथा सुनाता है।


अग्निपुत्र सीरीज के उपन्यास :-

1 मायाजाल

2 महामाया 

3 महादंड 

4 महाकाल

5 खुदा का बेटा

6 महाबली

7 महाक्रोधी

8 महारथी

9 महायोगी

10 महामंत्र

11 महादह

12 महापाप

13 महाविनाश

14 महासंग्राम

15 महाकांड

16 अग्निपुत्र

17 अग्निकुंड

18 रक्तपात

19 रक्तमंदिर

20रक्त धारा

21 रक्तसिंदुर

22 रक्तसागर

23 शांग्रिला

24 रक्तपिपासु

25 रक्तरेखा

26 रक्तआहुति

27 रक्तकलश

28 रक्तकुंडली

29 रक्तसुंदरी

30 रक्त आत्मा

31 रक्त मुंड

32 रक्त सुरा

33 मृत्युंजय

34 रक्तांचल

35 रक्त देव

36 रक्त भैरवी

37 रक्त मंथन

38 मृत्युराग

39 मृत्युदश

40 मृत्युधाम

41 मृत्युजाल

42 मृत्युरथ

43 मृत्युद्वार

44 शाही रक्कासा

45 मिस्त्र की शहजादी

46 सफेद कबूतरी

47 मल्लिका का ताज

48 शाही जल्लाद

49 ताजपोशी

50 जादूगरनी

51 दोधारी तलवार

52 तौर ग्रह के हत्यारे

53 तौर ग्रह के देवता

54 तौर ग्रह के बंजारे

55 मंगोल सुंदरी

56 तौर ग्रह के छापामार

57 अभिसारिका

58 सुर्ख सैलाब

59 सरहदी भेड़िए

60 शिकारी मलिका

61 तौर के लुटेरे

62 रेगिस्तानी कबीले की मलिका 

63 हुंकार

64 आमरा

65 आमरा का इंतजाम

66 विनाश चक्र

67 बिल्ला हरुमा

68 शिंगुर के दरिंदे

69 शाबा

70 शंखनाद



कमलकांंत सीरीज में भँवरे जैसी फितरत वाला मुख्य नायक कमलकांत आपराधिक संगठनो से टकराता है | इन संगठनो के पास विचित्र शक्तियां भी होती है | कमलकांत को ये दुश्मन लगभग नेस्तनाबूद कर देते है और उसे मरा हुआ मान लेते है | पर एक दिन कमलकांत फिर वापिस आता है और इनके सर पर तलवार बनकर लटकने लगता है | सीरीज में कमलकांत के जीवन में विभिन्न लड़किया/प्रेमिकाएं भी आती हैं और इन में से लगभग सभी के पास कोई न कोई शक्ति होती है | आरंभ के तीन उपन्यास ( चक्रव्यूह, चक्रवात, त्रिशूल ) उस समय ये सीरीज इतनी प्रसिद्ध नही हो पाई थी। लेकिन जब मनोज पब्लिकेशन ने इस सीरीज के 4थे उपन्यास जोरावर को प्रकाशित किया तो पहली बार इस सीरीज की बुक को क्रम नंबर दिए गए। दिल तो कातिल है उपन्यास के बाद चिड़ीमार नामक उपन्यास अनाउंस किया था लेकिन दुर्भाग्यवश वो पूरा होने से पहले ही राजभारती जी हमारे बीच नहीं रहे। 


कमलकांत सीरीज के उपन्यास :-

1 चक्रव्यूह

2 चक्रवात

3 त्रिशूल

4 जोरावर

5 खूनी आंखे कातिल हाथ

6 कहर आंखों का 

7 हाईकमांड

8 नीली आंखों के गुलाम

9 मौत का साज

10 अजनबी लोग अनजाने खतरे

11 नागिन

12 छछूंदर

13 गोली की रफ्तार

14 होश उड़ा दूंगा

15 काली बिल्ली

16 बवंडर

17 काठ की हांडी

18 नाक का बाल

19 खुदा खैर करे

20 अंधा खलीफा

21 करामती शे

22 तिगनी का नाच

23 तेरी गर्दन मेरे हाथ

24 मौत खड़ी तेरे द्वारे

25 विषकन्या

26 हिसाब बराबर

27 कातिल माने ना

28 काम तमाम

29 सारे दिमाग मेरे शिकार

30 दिल तो कातिल है

चिड़ीमार (अप्रकाशित)



संग्राम सीरीज में आपको मुख्य किरदार संग्राम के हंगामे और उसकी रक्त-रंजित आत्मकथा पढ़ने को मिलेगी | संग्राम कविता से प्रेम करता है और उसकी तलाश में भटक रहा है | ये सीरीज संग्राम की आपबीती की कहानी है जिसने अकेले ही संगठित कुख्यात माफिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और अंडरवर्ल्ड में कोहराम मचा दिया |


सागरपुत्र सीरीज के उपन्यास :-

1 सागर पुत्र

2 आतिश

3 समुंद्र मेरी मुट्ठी में

4 आक्रोश

5 अखनातून

6 सागर सम्राट

7 मादम गारथा के शिकारी


शालयार खान सीरीज के उपन्यास :-

1 शालयार खान

2 शाहबाज

3 दरिंदा

4 कहर

5 दोजख

6 बारूद

7 शिकस्त

8 बेरहम

9 शहंशाह

10 शतरंज

11 फतवा

12 ऐलान ए जंग

13 लावा


विजय सीरीज के उपन्यास :-

1 एक कत्ल और सही 

2 लाश का प्रतिशोध

3 शिकार शैतान के

4 कत्ल एक कातिल का

5 जरूरत है कातिल की

6 सितारों का बादशाह रेगिस्तान के शिकारी

7 सितारों का बादशाह रेगिस्तान का षड्यंत्र

8 सितारों का बादशाह रेगिस्तान के लुटेरे

9 सितारों का बादशाह रेगिस्तान का नक्शा

10 रक्तद्विप तोरा तोरा तोरा

11 रक्तद्वीप तोरा तोरा तोरा का खजाना

12 रक्तद्विप तोरा तोरा तोरा के पुजारी

13 दहशत पिरामिडों का आतंक

14 दहशत कालापहाड़

15 शुक्रग्रह की शहजादी

16 मौत एक गद्दार की

17 मृत्युदूत

18 जिंदा का कब्रिस्तान

19 कत्ल न होने दूंगा 

20 मौत के खरीददार

21 लाश का अपहरण

22 रूहो की राजकुमारी

23 निशाना चूक ना जाये

24 काली नकाब

25 मौत सस्ती है

26 पिस्तौल के खिलाड़ी

27 कत्ल होने दो

28 लाल तिल

29 कतले आम

30 हसीन लाश

31 तमचा जान

32 शैतान के शिकार

33 कामिला लेबनान में हंगामा

34 कामीला मौत का सम्राट

35 बॉबी का कातिल

36 शिकार

37 मौत ने पुकारा

38 सफेद बिच्छू

39 उस रात से पहले

40 जुनून मौत का

41 सुनहरा मौती

42 मौत आती है

43 मौत की बस्ती

44 पान का बादशाह

45 नीली आंखों वाली लड़की ऑपरेशन ब्लास्ट

46 नीली आंखों वाली लड़की

47 सुनहरी नागिन

48 हीरो की घाटी

49 मौत ही मौत

50 आंधी मौत

51 काली बस्ती काले लोग

52 हथियार फैंक दो

53 मौत मेरे पीछे

54 कातिलों के बीच

55 तीसरी आंख

56 कातिलों की बस्ती

57 शैतान की ओलाद

58 मौत के फरिश्ते

59 हत्यारों की बस्ती

60 काला बिच्छू

61 सन्नाटे का कातिल

62 जान के दुश्मन

63 मौत का उपहार

64 अधूरी लाशे

65 अंतरिक्ष का खुदा


राज भारती जी की लिखी सागर और विजय सीरीज से ये 3 पार्ट भी बहुत फेमस हुए थे:-

1 तोरा तोरा तोरा

2 तोरा तोरा तोरा के पुजारी

3 तोरा तोरा तोरा का खज़ना


राज भारती जी आज हमारे बीच नहीं है पर अपने उपन्यासों के माध्यम से वे सदा पाठकों के हृदय में बसे रहेंगे।