वेद प्रकाश शर्मा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
वेद प्रकाश शर्मा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

20 जनवरी 2022

वेद प्रकाश शर्मा - हिंदी उपन्यासकार



साथियों, वैसे तो वेद प्रकाश शर्मा जी को किसी परिचय की आवश्यकता नही है पर हमारा ये पोस्ट उन्हीं पर आधारित है। 

वेद प्रकाश शर्मा जी हिंदी लोकप्रिय साहित्य (लुगदी साहित्य) में अपने समय के सबसे प्रसिद्ध उपन्यासकारों में से एक रहे हैं। इनका जन्म वर्ष 1955 में मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था और निधन वर्ष 2017 में कैंसर की बीमारी के कारण हुआ था। इनके परिवार में इनकी पत्नी, तीन पुत्रियां तथा एक पुत्र है। इनके पुत्र शगुन शर्मा भी एक उपन्यासकार हैं और अब तक 30 से भी अधिक उपन्यास लिख चुके हैं। 

वेद जी ने अपने 40 से भी अधिक वर्षों के लेखन कैरियर में 170 से ज्यादा उपन्यास लिखे हैं। वेद जी ने अपना कैरियर भूत लेखक (घोस्ट राइटर) के रूप में आरंभ किया था और कुछ वर्ष पश्चात इनके उपन्यास स्वयं के नाम से भी प्रकाशित होने लगे। 1973 में प्रकाशित "दहकते शहर" उपन्यास वेद जी का स्वयं के नाम से प्रकाशित हुआ प्रथम उपन्यास था। यहां से वेद जी सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए और शीघ्र ही अग्रणी लेखकों में इनका नाम लिया जाने लगा। वेद जी मुख्यत: थ्रिलर, सस्पेंस एवं जासूसी श्रेणी के उपन्यास लिखते थे। इन सभी श्रेणियों में इनके बहुत से उपन्यास सफल रहे हैं और पाठकों द्वारा सराहे गए हैं। बहू मांगे इंसाफ, गैंडा, विजय और केशव पंडित, कोख का मोती, विजय के सात फेरे, कैदी नंबर 100, शाकाहारी खंजर, मंगल सम्राट विकास, चकमा, लल्लू, एक मुट्ठी दर्द तथा ऐसे और भी अनेक उपन्यास इनके सफल उपन्यासों की सूची में शामिल हैं। खासकर "वर्दी वाला गुंडा" उपन्यास इनका अब तक का सफलतम और सर्वाधिक बिकने वाला उपन्यास रहा है। 

 जब वेद जी का "वर्दी वाला गुंडा" उपन्यास प्रकाशित हुआ तो इसने उस समय के उपन्यास बिक्री के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। कई बार इसका रिप्रिंट किया गया। बहुत सी जगहों पे इसके पोस्टर भी लगे और खूब धूम मची इस उपन्यास की। लोकप्रिय साहित्य के किसी उपन्यास के लिए ये एक प्रेरणादायक और अनूठा मुकाम था।

अब अगर पात्रों की बात की जाए तो वेद जी ने विकास, केशव पंडित और विभा जिंदल जैसे प्रसिद्ध पात्रों का सृजन दिया। हालांकि वेद जी केशव पंडित को लेकर ज्यादा उपन्यास नही लिख पाए थे परंतु उनका "केशव पंडित" पात्र हिंदी उपन्यास जगत ने इतना प्रसिद्ध हुआ था कि अनेक प्रकाशकों ने केशव पंडित के नाम की सफलता को भुनाने के लिए अपने भूत लेखकों से केशव पंडित के उपन्यास लिखवा कर मार्केट में बेचने शुरू कर दिए। केशव पंडित की प्रसिद्धि का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि एक लंबे समय तक केशव पंडित के नाम से छपने वाले नकली उपन्यास भी अच्छे-खासे बिकते रहे। 
वेद प्रकाश शर्मा जी पहले से ही वेद प्रकाश कंबोज जी को अपना गुरु और प्रेरणा मानते थे। वेद जी ने कंबोज जी के विजय, रघुनाथ, अल्फांसे, सिंगही, बागारोफ जैसे पात्रों को अपने अंदाज में बेहद सफलता से प्रस्तुत किया है। 

पहले वेद जी के उपन्यास अलग-अलग प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित किए जाते थे। बाद में वेद जी ने वर्ष 1985 में अपने प्रकाशन संस्थान "तुलसी पॉकेट बुक्स" की स्थापना की और फिर उनके बाकी उपन्यास यहीं से प्रकाशित हुए। इनके लगभग 70 के करीब उपन्यास तुलसी पॉकेट बुक्स से ही प्रकाशित हुए हैं। 
वेद जी के कई उपन्यासों पर हिंदी फिल्में भी बन चुकी हैं जैसे कि सबसे बड़ा खिलाड़ी, अनाम, इंटरनेशनल खिलाड़ी, बहू मांगे इंसाफ। इनके केशव पंडित नामक पात्र पर बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा एक टीवी सीरियल भी बनाया जा चुका है। इसके अलावा वेद जी ने बालाजी टेलीफिल्म्स के साथ कुछ और प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया था। 

"अतरंगी रे" फिल्म के इस दृश्य में अक्षय कुमार वेद जी का उपन्यास "सुपरस्टार" हाथ में लिए हुए हैं और उसे पढ़ रहे होते हैं। एक और दिलचस्प बात ये है कि सुपरस्टार उपन्यास वेद जी द्वारा अपने समय के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता राजेश खन्ना के जीवन से प्रेरित होकर लिखा गया था और राजेश खन्ना जी रिश्ते में अक्षय कुमार के ससुर हैं। यहां पर आपको ये भी बता दें कि अक्षय कुमार पहले भी वेद जी के उपन्यासों पर आधारित कुछ फिल्मों में काम कर चुके हैं।

वेद जी को उनके उत्कृष्ट लेखन कार्य के लिए "मेरठ रत्न" तथा "नटराज भूषण" जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

वेद जी पाठकों द्वारा दिए गए प्यार को ही सबसे महत्त्वपूर्ण मानते थे। वेद जी शुरू से ही पाठकों की उपन्यासों के प्रति रुचि तथा उनकी नब्ज अच्छी तरह से पहचानते थे और इसी कारण अपने पाठकों पर उनकी पकड़ हमेशा बेहद मजबूत रही थी। आज भी बहुत से पाठक उनके उपन्यास बेहद चाव से पढ़ते हैं और उन्हें याद करते हैं। 

वेद जी द्वारा लिखे गए उपन्यासों ने लाखों-करोड़ों पाठकों का मनोरंजन किया है। हिंदी लोकप्रिय साहित्य में उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। इस आलेख के माध्यम से हम वेद जी को भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 

वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित उपन्यासों की सूची :-
1 दहकते शहर
 2 आग के बेटे
 3 खूनी छलावा 
 4 छलावा और शैतान 
 5 महाबली टुम्बकटू
 6 विकास दी ग्रेट 
 7 प्रलयकारी विकास 
 8 एक मुठ्ठी दर्द 
 9 विकास और मैकांबर
10 विकास मैकांबर के देश में
11 मैकांबर का अंत
12 अपराधी विकास
13 मंगल सम्राट विकास 
14 विनाश दूत विकास 
15 विकास की वापसी 
16 विजय और विकास 
17 पहली क्रांति 
18 दूसरी क्रांति 
19 तीसरी क्रांति 
20 क्रांति का देवता 
21 इंकलाब का पुजारी 
22 सबसे बड़ा जासूस 
23 चीते का दुश्मन 
24 सुमन
25 सी. आई.ए. का आतंक 
26 बदसूरत 
27 प्रिंसेस जैक्सन का देश 
28 पाकिस्तान का बदला 
29 विश्व विजेता 
30 हीरों का बादशाह 
31 अर्थी मेरे प्यार की  
32 रहस्य के बीच
33 तीन तिलंगे 
34 आग लगे दौलत को  
35 शहीदो की चिता 
36 खून की धरती
37 तिरंगा झुके नहीं
38 वतन की कसम 
39 सिंगही और मर्डर लैंड 
40 देवकांता संतति भाग-1-2 
41 देवकांता संतति भाग-3-4
42 देवकांता संतति भाग-5-6
43 देवकांता संतति भाग-7-8
44 देवकांता संतति भाग-9-10
45 देवकांता संतति भाग-11-12
46 देवकांता संतति भाग-13-14
47 लाश कहाँ छुपाऊ 
48 कानून मेरे पीछे 
49 आलपिन का खिलाडी
50 वतन 
51 गुलिश्तां खिल उठा  
52 आयरन मैन 
53 कोबरा का दुश्मन
54 सफ़ेद चूहा 
55 खून दो आजादी लो
56 बिच्छू 
57 हिन्द का बेटा
58 देश न जल जाये
59 कानून बदल डालो
60 फ़ासी दो कानून को
61 जला हुआ वतन
62 चीख उठा हिमालय
63 दौलत है ईमान मेरा
64 आ बैल मुझे मार
65 धरती बनी दुल्हन
66 विश्व युद्ध की आग 
67 चकमा
68 खून ने रंग बदला
69 रूक गयी धरती 
70 कर्फ्यू
71 शेर का बच्चा
72 जजमेंट
73 हत्यारा कौन
74 मत रो माँ
75 लाखों हैं लाल मेरे
76 हिंसक 
77 दरिंदा 
78 गैंडा
79 क़त्ल ए आम 
80 जय हिन्द
81 वन्दे मातरम 
82 दौलत पर टपका खून 
83 एक कब्र सरहद पर 
84 रणभूमि
85 गन का फैसला
86 राखी और सिन्दूर
87 माटी मेरे देश की
88 एक और अभिमन्यु 
89 सारे जहां से ऊँचा 
90 सभी दीवाने दौलत के 
91 इंकलाब जिंदाबाद 
92 दूध ना बख्शूंगी 
93 धर्मयुद्ध 
94 बहू मांगे इन्साफ 
95 साढ़े तीन घंटे 
96 अलफांसे की शादी 
97 कफ़न तेरे बेटे का 
98 विधवा का पति 
99 हत्या एक सुहागन की 
100 कैदी न. १०० 
101 इंसाफ का सूरज 
102 दुल्हन मांगे दहेज़ 
103 सुलग उठा सिन्दूर 
104 मेरे बच्चे मेरा घर 
105 आज का रावण 
106 नसीब मेरा दुशमन 
107 बहु की आवाज
108 शीशे की अयोध्या
109 औरत एक पहेली
110 केशव पंडित 
111 कानून का पंडित 
112 कानून का बेटा  
113 विजय और केशव पंडित 
114 कोंख का मोती 
115 मांग में अंगारे
116 बीवी का नशा
117 साजन की साजिश 
118 सबसे बड़ी साजिश
119 भगवान नंबर दो 
120 सुहाग से बड़ा 
121 चक्रव्यहू 
122 जुर्म की माँ 
123 कुबड़ा  
124 नाम का हिटलर 
125 कानून नहीं बिकेगा 
126 दौलत मांगे खून 
127 दहेज़ में रिवाल्वर 
128 जादू भरा जाल 
129 वर्दी वाला गुंडा 
130 जिगर का टुकड़ा
131 लल्लू
132 रैना कहे पुकार के
133 भस्मासुर
134 मेरा बेटा सबका बाप 
135 पागल 
136 मि. चैलेंज 
137 वो साल खद्दरवाला 
138 कातिल होतो ऐसा 
139 शाकाहारी खंजर 
140 मदारी
141 फंस गया अलफांसे 
142 पंगा 
143 कारीगर 
144 ट्रिक 
145 कठपुतली 
146 एक थप्पड़ हिंदुस्तानी 
147 पाक-साफ़ 
148 गूंगा 
149 डमरूवाला 
150 असली खिलाडी 
151 शिखंडी 
152 रामबाण 
153 दूर की कौड़ी 
154 काला अंग्रेज 
155 फिरंगी 
156 खलीफा 
157 शंखनाद 
158 क्यूंकि वो बीवियां बदलते थे 
159 वेदमंत्र 
160 अंगारा 
161 शेखचिल्ली 
162 हत्यारा मंगलसूत्र 
163 केशव पंडित की वापसी 
164 विजय के सात फेरे 
165 नौकरी डाट कॉम 
166 खेल गया खेल 
167 सुपरस्टार 
168 पैंतरा 
169 कश्मीर का बेटा 
170 चलते पुर्जे 
171 डायन 
172 डायन -2 
173 सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री 
174 अपने कत्ल की सुपारी
175 गद्दार देशभक्त
176 आनर किलींग
177 छठी उंगली
178 भयंकरा

आप सभी के लिए उपलब्ध वेद प्रकाश शर्मा जी के उपन्यास संग्रह की एक झलक!

कमेंट्स के माध्यम से अपने विचार हमारे साथ जरूर शेयर करें।

15 दिसंबर 2021

वर्दी वाला फरिश्ता - वेद प्रकाश शर्मा

प्रिय साथियों ! अप्रकाशित उपन्यासों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज आपको इस पोस्ट में हम बताने जा रहे हैं वेद प्रकाश शर्मा के अब तक अप्रकाशित उपन्यास " वर्दी वाला फरिश्ता " के बारे में ! 

                       उपन्यास वर्दी वाला फरिश्ता का विज्ञापन 

"वर्दी वाला फरिश्ता" उपन्यास का विज्ञापन वेद प्रकाश शर्मा जी के 157वें उपन्यास के तौर पर दिया गया था और विज्ञापन के अनुसार उपन्यास के तुलसी पेपर बुक्स से प्रकाशित होने की संभावना थी। परंतु ये उपन्यास कभी प्रकाशित ही नहीं हुआ!

इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न आलेखों को चेक करने के पश्चात प्राप्त हुई संक्षिप्त जानकारी के अनुसार वेद जी "वर्दी वाला गुंडा" उपन्यास की भारी सफलता के बाद से ही एक ऐसा उपन्यास लिखना चाहते थे जिसमे पुलिस की अच्छी और नायक वाली छवि दिखाई जा सके। "वर्दी वाला गुंडा" उपन्यास में पुलिस की भूमिका अधिकांशत: नकारात्मक ही थी। 
अब ये जानकारी सही है या गलत - इस बारे में या तो वेद जी के परिवार का कोई सदस्य बता सकता है या फिर कोई पुराना प्रकाशक या फिर कोई पाठक जो इस बारे में कुछ जानता हो!

मेरी राय में अगर वेद जी पुलिस की अच्छी छवि और किसी पुलिस वाले को मुख्य सकारात्मक भूमिका में रखकर ये उपन्यास लिखते और उपन्यास प्रकाशित होता तो निश्चय ही पाठक इस उपन्यास को पढ़ने के प्रति अपनी दिलचस्पी प्रदर्शित करते!

क्या यह उपन्यास लिखा ही नहीं जा सका? 
क्या उपन्यास का लेखन कार्य किसी कारणवश अधूरा ही रह गया? 
अगर उपन्यास पूरा लिखा जा चुका था तो फिर प्रकाशित क्यों नहीं हो पाया? 
ये सब प्रश्न अब तक अनुत्तरित हैं।

अगर आपके पास इस बारे में कोई जानकारी हो तो कमेंट्स के माध्यम से हमारे साथ शेयर कर सकते हैं |

10 सितंबर 2021

साढ़े तीन घंटे - वेद प्रकाश शर्मा

उपन्यास 📖 :- साढ़े तीन घंटे 
लेखक ✍ :- श्री वेद प्रकाश शर्मा
पृष्ठ 📃 :- 368

"साढ़े तीन घंटे" वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित विभा जिंदल सीरीज का एक जबरदस्त उपन्यास है। 

विभा जिससे वेद कॉलेज के दिनों में एक-तरफा प्यार करता था। 
वेद अपनी पत्नी मधु के साथ अपनी सालगिरह पर घूमने के लिए जिन्दलपुरम जाता है जहाँ संयोग से उसकी मुलाकात विभा से होती है जिसकी अब शादी हो चुकी है और उसके पति का नाम अनूप जिंदल है।

विभा वेद से मिलकर खुश होती है। विभा और अनूप दोनों वेद और मधु को अपने पैलेस में डिनर के लिए आमंत्रित करते है। 
जब वेद और मधु, मंदिर (पैलेस का नाम) पहुँचते है तो पता चलता है कि अनूप एक कमरे में बंद है और साढ़े तीन घंटे बाद बाहर निकलेंगे। विभा बहुत परेशान है लेकिन साढ़े तीन घंटे बाद उसी रूम से एक गोली चलने की आवाज़ आती है। सभी मिलकर दरवाजे को तोड़ डालते है जहाँ अनूप की लाश मिलती है। उसने आत्महत्या कर ली है और सामने एक पहेली का चित्र है। 
लेकिन विभा का कहना है कि ये आत्महत्या नही बल्कि हत्या है, जो कि अनूप को मजबूर करके करवाई गई है। 

हत्यारा एक पहेली देता है और साढ़े तीन घंटे का समय ...! अगर साढ़े तीन घंटे में पहेली हल नही हुई तो आत्महत्या करनी होगी। 

फिर शुरू होता है हत्याओं का सिलसिला जो जिन्दलपुरम को हिला देता है।

आखिर कौन है ये हत्यारा और क्यों कर रहा है वो ये हत्याएं?
वेद और विभा क्या हत्यारे तक पहुंच पाएंगे?
पुलिस क्या कर रही है?
संतरे का क्या राज़ है जिसे खोलने की धमकी देकर कोई अनूप को ब्लैकमेल कर रहा था?

इन सभी सवालों का जवाब है - साढ़े तीन घंटे।

मेरी राय में ये वेद जी का लिखा हुआ एक ऐसा सस्पेंस से भरपूर उपन्यास है जिसमे आप अंत तक हत्यारे को नही पहचान पाएंगे, न ही उस पहेली को हल कर पाएंगे। 

एक बार जरूर पढ़िए वेद जी द्वारा लिखित साढ़े तीन घंटे...

12 जून 2021

'केशव पंडित' उपन्यास - वेद प्रकाश शर्मा

सबसे पहले तो आप सभी को मेरी तरफ से नमस्ते 🙏🙏

मुझे बचपन से ही किताबो को पढ़ने का शौक रहा है - पहले स्कूल की पाठ्य पुस्तकें पढ़ते थे और अब नॉवेल इत्यादि | स्कूल टाइम में नॉवेल क्या होते है, ये पता ही नही होता था | 

उस समय जो हिंदी की पाठ्य पुस्तकें होती थी, उनमें जो कहानियां लिखी होती थी, उन्हे पढ़ता था और उन्हें भी पता नही कितनी बार पढ़ चुका होता था | कई-कई बार तो अपनी क्लास से ऊपर वाली क्लास वालो की हिंदी बुक लेकर उनमें कहानियां पढ़ता था और कुछ समय बाद वो भी खत्म हो जाती थी | कहने का तात्पर्य है कि पहला प्रेम स्कूल की पाठ्य पुस्तकें ही रही है ।

स्कूल खत्म होने के बाद जब भी कभी कही जाना होता तो रेलवे स्टेशन या फिर बस स्टैंड पर जरूरी रुकना होता था, उनके पास से हमेशा कभी बालहंस , बाल केसरी, हितोपदेश , हातिमताई , सिंदबाद जहाजी आदि की किताबे ले लेता और उन्हे पढ़ता ।



अब शुरू करते हैं इस पुस्तक के बारे में बात जो सबसे अच्छी लगी ओर मन में बस गई | वैसे तो पढ़ने को महाभारत रामायण आदि भी काफी बार पढ़ी है, पर बात है सबसे अच्छी और जो मन में बसी - जी हाँ तो वो पुस्तक है श्री वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित केशव पंडित | ये सबसे अच्छा लगी |


(वैसे आप सभी को एक बात बता दू की श्री वेद प्रकाश शर्मा जी ने कुल 177 के आस पास उपन्यास लिखे है और आप उनमें से कोई भी आंखे बाद करके उठा ले, आप उनको पढ़ कर निराश नहीं होंगे) 

वेद जी ने केशव पंडित के ऊपर लगभग 11-12 उपन्यास लिखे है जिसमे केशव पंडित दो भागो में लिखा गया है पहला भाग केशव पंडित है और दूसरा कानून का बेटा ।

केशव पंडित को मुख्य रूप से वेद प्रकाश शर्मा जी ने ही रचा था और इसकी शुरुआत (बहु मांगे इंसाफ) से हुई थी जिसमे केशव को पहली बार सभी के सामने दिखाया गया था। एक लंबे अरसे बाद वेद प्रकाश शर्मा जी ने केशव को केशव पंडित की वापसी, विजय ओर केशव पंडित, विजय के सात फेरे और कोख का मोती जैसे नॉवेल से दुबारा पाठको के बीच लेकर आए थे।

केशव पंडित नाम का करेक्टर इतना फैमस हुआ की पाठक वेद जी से केशव पंडित सीरीज के ओर नोवेल्स की डिमांड करने लगे | वेद जी केशव पंडित को लेकर इतने नॉवेल नही लिख पाए। बाकी पॉकेट बुक्स ने इस डिमांड का काफी ज्यादा फायदा उठाना शुरू कर दिया और मार्केट में केशव पंडित के नाम से लिखने वाले घोस्ट राइटर की लाइन लगने लगी | इन घोस्ट राइटर में से कुछ का नाम में यहां बताना चाहूंगा जिसमे केशर पंडित, केवल पंडित, गौरी पंडित, आर्शीवाद पंडित, अभिमन्यु पंडित और प्रकाश पंडित थे। इन घोस्ट राइटर ने केशव की शादी करवा दी, बेटा करवा दिया, असिस्टेंट बनवा दिए और यहां तक कि केशव पंडित के बेटे के नाम पर भी उपन्यास लिखने लगे 😂😂 | कुछ राइटर्स ने तो सीधा केशव पंडित के नाम से भी लिखना शुरू कर दिया और काफी ज्यादा लिखा।

श्री वेद प्रकाश शर्मा जी के बेटे शगुन शर्मा ने भी केशव पंडित सीरीज के नोवेल्स पब्लिश किए | 

केशव पंडित के ऊपर एकता कपूर ने 1 टीवी सीरियल भी बनाया था जो zee टीवी पर आया था (सीरियल का अभी नाम याद नही पर वो 2010 के आस पास आया था और उसमे सरवर आहूजा ने केशव का रोल निभाया था) |

वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखे केशव पंडित सीरीज के सभी नोवल अच्छे हैं पर इनके मुझे केशव पंडित सीरीज के चार उपन्यास सबसे अच्छे लगे जिनमे केशव पंडित की वापसी, विजय ओर केशव पंडित, कोख का मोती और विजय के सात फेरे सबसे ज्यादा पसंद आये | 

इन उपन्यासों में बताया गया है कि केशव पंडित इंडियन सिक्रेट सर्विस के चीफ विजय और विजय के भांजे जासूस विकाश को जानता है. जब केशव वापिस विजय विकाश के शहर में आता है तो विकाश अपने गर्म स्वभाव के कारण केशव पंडित से टकराव की शुरुआत करता है. फिर केशव आपने दिमाग से ऐसी ऐसी शातिर चाले चलता है कि विकाश को पता ही नही चलता की हो क्या रहा है और क्या नहीं. विकाश को फसा हुआ देख के उसे बचाने के लिए विजय को मैदान में आना पड़ता है. फिर विजय को अपना सारा दिमाग और सिक्रेट सर्विस की सारी ताकत केशव से टकराने में लगानी पड़ती है. केशव यहां पर ना सिर्फ विजय से टकराता है बल्कि सिक्रेट सर्विस के सारे एजेंट और विकाश को अदालत में मुजरिम साबित कर के जेल भिजवा देता है. यहां जज भी केशव की दलीलों ओर गवाहों को काट नही पता . सरकार भी सिक्रेट सर्विस एजेंट्स की सीधी हेल्प करने से मना कर देती है. वेद प्रकाश शर्मा जी ने केशव और विजय के टकराव में बैलेंस(संतुलन) बनाया हुआ था क्योंकि दोनो ही वेद जी के प्रिय किरदार थे . वेद जी ने पूरे घटना क्रम को जिस तरह से लिखा है वो कबीले तारीफ है।(यहां खास बात ये है की केशव ज्यादातर मौकों पर अकेले ही अपने दिमाग के दम पर विजय और विकाश और पूरी सिक्रेट सर्विस से बराबर की टक्कर लेता है।)

कुल मिलाकर वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखा ये एक बहुत ही रोचक किरदार है | मेरे हिसाब से वेद जी ने भी नही सोचा होगा कि उनका ये किरदार उपन्यासों की दुनिया में इतना लोकप्रिय होगा । केशव पंडित सीरीज में वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित उपन्यास 👉

1 केशव पंडित

2 कानून का बेटा 

3 बहू मांगे इंसाफ

4 हत्या एक सुहागिन की

5 कैदी नंबर 100

6 विजय और केशव पंडित

7 कोख का मोती

8 केशव पंडित की वापसी

9 विजय के सात फेरे

10 काला अंग्रेज़

11 फिरंगी।

ये सभी उपन्यास वेद प्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित केशव पंडित सीरीज के है।

अंत में यही कहूंगा - वेद सर ने केशव पंडित के किरदार को काफी बढ़िया लिखा | किसी एक विषय के बारे मे बिना अध्ययन किए कुछ नही लिखा जा सकता ओर उन्होंने शायद केशव पंडित को लिखने के लिए उसका अध्ययन किया |

शायद वो इसे और भी ज्यादा लिखते पर उसके लिए संपूर्ण कानून की जानकारी ओर उसे पढ़ना पड़ता | फिर भी जिस रूप में उन्होंने केशव पंडित को लिखा, लाजवाब लिखा है |

अंत में अपने शब्दो को विराम देता हूं ओर यही कहूंगा कि हर एक को शायद ना आए पर मुझे काफी ज्यादा पसंद आए |

(सभी का टेस्ट अलग होता है मेरे भाई, किसी को कुछ पसंद किसी को कुछ) तो एक बार आप सभी से कहूंगा एक बार इसे पढ़ कर जरूर देखे |